क्या आपकी NGO सुरक्षित है? POSH कानून, नाशिक की घटना और छोटा कार्यबल वाली गलत धारणा!
April 30, 2026
क्या आपकी NGO सुरक्षित है? POSH कानून, नाशिक की घटना और छोटा कार्यबल वाली गलत धारणा! - CSR
”अरे सर, हमारे यहाँ तो कुल 5-6 लोग ही हैं, सब एक परिवार की तरह रहते हैं। हमारे यहाँ POSH (Prevention of Sexual Harassment) की क्या ज़रूरत?”
ये लाइनें आपने भी कई बार सुनी होंगी। अक्सर छोटे NGOs और सोशल सेक्टर के साथियों को लगता है कि POSH एक्ट सिर्फ बड़ी-बड़ी चकाचौंध वाली कॉर्पोरेट कंपनियों के लिए है। लेकिन नाशिक में हाल ही में हुए TCS मामले ने हमें विचलित किया है। जब एक इतनी बड़ी कंपनी में सुरक्षा के सवाल उठ सकते हैं, तो सोचिए हमारे छोटे NGOs में काम करने वाली महिला कितनी सुरक्षित हैं?
आज इस आर्टिकल में हम किसी भारी-भरकम कानूनी शब्द का इस्तेमाल नहीं करेंगे। हम बात करेंगे सीधी भाषा में—कि आपकी छोटी सी संस्था में सुरक्षा का ‘कवच’ कैसे तैयार हो।
पहली गलतधारणा: “स्टाफ १० से कम है, तो कानून लागू नहीं होता”
यह सबसे बड़ा झूठ है। POSH कानून हर उस जगह लागू होता है जहाँ काम हो रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि:
अगर स्टाफ १० से ज्यादा है: तो आपको अपनी संस्था के अंदर एक IC (Internal Committee) बनानी पड़ती है।
अगर स्टाफ १० से कम है: तो भी कानून आप पर लागू है! बस आपकी शिकायत की जगह बदल जाती है। ऐसी स्थिति में, कानून का ‘सेक्शन 6’ (Section 6) कहता है कि शिकायत LC (Local Committee) यानी ‘स्थानीय समिति’ के पास जाएगी, जो हर जिले के कलेक्टर ऑफिस में होती है।
कानून की नज़र में सुरक्षा सबका हक है।
फील्ड वर्कर्स का जोखिम: ऑफिस की चार दीवारों के बाहर भी सुरक्षा
NGO सेक्टर में महिला कर्मचारी अक्सर अकेले सफर करती हैं, गांव-गांव जाती हैं, अनजान लोगों से मिलती हैं। POSH कानून सिर्फ ‘ऑफिस’ तक सीमित नहीं है। अगर फील्ड विजिट के दौरान, यात्रा करते समय या किसी स्टेकहोल्डर के साथ मीटिंग में कुछ गलत होता है, तो वह भी POSH के दायरे में आता है।
एक संस्था के तौर पर, क्या आपने फील्ड वर्कर्स को बताया है कि ऐसी स्थिति में उन्हें क्या करना चाहिए?
बिना बजट के POSH कैसे लागू करें? (Small Budget, Big Impact)
कई NGO लीडर्स को लगता है कि POSH कंप्लायंस मतलब बहुत सारा खर्चा और महंगे वकील। ऐसा नहीं है! आप बिना किसी बड़े बजट के ये ३ काम कर सकते हैं:
पोस्टर और जानकारी: अपने ऑफिस में एक सिंपल चार्ट लगाएँ जिसमें लिखा हो कि यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) क्या है और जिले की ‘Local Committee’ का पता या फोन नंबर क्या है। प्रत्येक ब्लॉक/तहसील/नगरपालिका में एक नोडल अधिकारी होता है, जो शिकायत लेकर उसे जिला कार्यालय भेजता है।इस प्रक्रिया के माध्यम से ७ दिनों के भीतर शिकायत का समाधान सुनिश्चित किया जाता है।
चाय पर चर्चा: महीने में एक बार अपनी टीम के साथ बैठकर सुरक्षा पर बात करें। उन्हें बताएँ कि संस्था उनके साथ खड़ी है। इसे ‘अवेयरनेस सेशन’ का नाम दें।
She-Box का इस्तेमाल: भारत सरकार का एक ऑनलाइन पोर्टल है—She-Box। अपनी महिला कर्मचारियों को इसके बारे में बताएँ। यहाँ से कोई भी महिला सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है।
फंडर्स की बढ़ती मांग: अब यह चॉइस नहीं, ज़रूरत है
आजकल CSR प्रोजेक्ट्स या विदेशी फंडिंग मिलने से पहले फंडर्स पूछते हैं—“क्या आपकी संस्था POSH Compliant है?”
अगर आप एक CSR प्रोफेशनल हैं या NGO चलाते हैं, तो याद रखिए कि आने वाले समय में बिना POSH पॉलिसी के फंड मिलना मुश्किल हो जाएगा। यह आपके प्रोफेशनलिज्म की निशानी है।
शिकायत कहाँ करें? (Block to District Level)
अगर आपकी संस्था छोटी है और आप किसी परेशानी में हैं, तो ये कदम उठाएँ:
ब्लॉक स्तर: अपने तहसील कार्यालय में ‘नोडल ऑफिसर’ से संपर्क करें।
जिला स्तर: जिला कलेक्टर कार्यालय में ‘स्थानीय समिति’ (Local Committee) को अपनी लिखित शिकायत दें।
कानूनन, इस समिति में कम से कम एक सदस्य NGO सेक्टर से होना अनिवार्य है, ताकि आपकी बात को संवेदनशीलता से समझा जा सके।
निष्कर्ष: विशाखा से नाशिक तक का सबक
१९९७ में विशाखा गाइडलाइंस एक सामाजिक कार्यकर्ता (भंवरी देवी) के संघर्ष की वजह से ही आई थीं। आज नाशिक के मामले ने हमें फिर से याद दिलाया है कि हमें चुप नहीं रहना है।
चाहे आप एक छोटी NGO चला रहे हों या किसी बड़ी संस्था में CSR हेड हों, याद रखिए: “सुरक्षा कागजों पर नहीं, नीयत में होनी चाहिए।“ अपनी संस्था में एक ऐसा माहौल बनाइए जहाँ काम करने वाली हर महिला गर्व से और बिना किसी डर के कह सके— “यह मेरा वर्कप्लेस है और मैं यहाँ सुरक्षित हूँ।“